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लेखनी कहानी -09-May-2024

ख़यालो ख्वाब पर कब्ज़ा मुझे अच्छा नहीं लगता। मुखौटे में छुपा चेहरा मुझे अच्छा नहीं लगता। ❣️ मुहब्बत में कनीज़¹ और बादशाहत का दिली रिश्ता। कभी भी इश्क़ में शजरा² मुझे अच्छा नहीं लगता। ❣️ मुझे ख़्वाबों में आने से कहां तुम रोक सकते हो। ख़यालों पर कोई पहरा मुझे अच्छा नहीं लगता। ❣️ दिलों में नुक्स,ज़हनों में ज़हर,बातों में नफ़रत हो। दिलों पर ज़ख़्म दे गहरा,मुझे अच्छा नही लगता। ❣️ "सगी़र" हाथों में दौलत हो,सभी को बांट देता मैं। कोई गु़र्बत³ में हो रुसवा⁴, मुझे अच्छा नहीं लगता। शब्दार्थ 1 सेविका, 2 वंश वृक्ष 3 गरीबी 4 शर्मिंदा

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2 Comments

Gunjan Kamal

03-Jun-2024 04:20 PM

👌🏻👏🏻

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Mohammed urooj khan

14-May-2024 11:11 PM

👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾

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